महाराजा अग्रसेन कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
नैक (NAAC) द्वारा 'A' ग्रेड प्राप्त संस्थान
Maharaja Agrasen College

ज्ञान संचय

GYAN SANCHAY

हिंदी शोध पत्रिका  ·  Hindi Research Journal

महाराजा अग्रसेन कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

📋 ISSN: आवेदन प्रक्रिया में 🏆 Peer Reviewed/Refereed 📖 Open Access — निःशुल्क 🎓 अर्धवार्षिक प्रकाशन
🔔   अंक-1 (January-June 2026) हेतु शोध आलेख आमंत्रित  |  📅 अंतिम तिथि: 15 अप्रैल 2026  |  ✉️ gyansanchay@mac.du.ac.in  | ✉️ hspmacdu@mac.du.ac.in  | ✉️ hindishodhpatrika@mac.du.ac.in  |  📞 9968283323   9868000996   8800366664  |  🏆 सहकर्मी-समीक्षित · निःशुल्क प्रकाशन · Open Access  |  🎓 भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परम्परा, हिंदी साहित्य के विविध आयाम, आधुनिक शिक्षा और समाज, राजनीतिविज्ञान, इतिहास और समाज, भाषा विज्ञान, मनोविज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मीडिया अध्ययन, सनातन अध्ययन, समकालीन विमर्श, भाषा एवं अनुवाद अध्ययन, वाणिज्य एवं अन्य संबंधित विषयों पर आलेख स्वीकार्य      

शोध पत्रिका के बारे में

About the Journal

"ज्ञान ही शक्ति है, शोध ही प्रगति का मार्ग।"

ज्ञान संचय महाराजा अग्रसेन कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय,दिल्ली की अर्द्धवार्षिक हिंदी शोध पत्रिका है,जिसका मुख्य ध्येय वैश्विक शोध समुदाय के लिए एक ऐसा उत्कृष्ट मंच उपलब्ध कराना है जहाँ भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परम्परा, हिंदी साहित्य के विविध आयाम, आधुनिक शिक्षा और समाज, राजनीतिविज्ञान, इतिहास और समाज, भाषा विज्ञान, मनोविज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मीडिया अध्ययन, सनातन अध्ययन, समकालीन विमर्श, भाषा एवं अनुवाद अध्ययन, वाणिज्य एवं अन्य संबंधित विषयों पर उच्च स्तरीय शोध का आदान-प्रदान हो सके। यह पत्रिका मौलिक, व्यावहारिक और गुणात्मक शोध के व्यापक प्रसार के प्रति समर्पित है। शोध की विश्वसनीयता और अकादमिक मानकों को अक्षुण्ण रखने के लिए, प्रत्येक पांडुलिपि को प्रकाशन से पूर्व एक कठोर अंध सहकर्मी समीक्षा (blind Peer Review) और गहन साहित्यिक चोरी (Plagiarism) जांच से गुजरना अनिवार्य है। 'ज्ञान संचय' का प्राथमिक उद्देश्य विद्वतापूर्ण उत्कृष्टता, आलोचनात्मक विश्लेषण और नवीन वैचारिक दृष्टिकोणों को प्रोत्साहित करना है। संपादकीय मंडल सक्रिय रूप से उन शोध कार्यों का स्वागत करता है जो पारंपरिक सीमाओं से परे जाकर ज्ञान के नए क्षितिज तलाशते हैं। इसी उद्देश्य के साथ, पत्रिका विश्व भर के शोधकर्ताओं, विद्वानों और विषय-विशेषज्ञों को अपने मौलिक शोध कार्य प्रस्तुत करने के लिए सादर आमंत्रित करती है।

सभी प्रकाशित आलेख अंध समीक्षा (Blind Peer Review/Refereed) प्रक्रिया से गुजरते हैं।

01
प्रकाशित अंक
Volumes
15+
प्रकाशित लेख
Articles
अर्द्धवार्षिक
आवृत्ति
Frequency
विशेषज्ञ सहकर्मी द्वारा पूर्व-समीक्षित शोध पत्रिका
सूचीकृत
Listed

सम्पादकीय की कलम से

Editorial

'ज्ञान ही शक्ति है, शोध ही प्रगति का मार्ग'

भारतीय सभ्यता ने ज्ञान को सिर्फ पुस्तकों में नहीं, अपितु जीवन के हर आयाम में समाहित किया है। यहाँ की मिट्टी की सुगंध में वेद है, नदियों के प्रवाह में दर्शन है और लोक-गीतों की धुन में सदियों का संचित अनुभव है। 'ज्ञान संचय' शोध पत्रिका का यह प्रथम अंक उसी अनमोल परम्परा को पुनः रेखांकित करने का एक सद्प्रयास है।

भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है — यह एक विचार है, एक दर्शन है, एक ऐसी जीवन-दृष्टि है जो सहस्राब्दियों के अनुभव से परिपक्व हुई है। आज विश्व तेज़ी से बदल रहा है तथा वैश्वीकरण की आँधी में स्थानीय संस्कृतियाँ अपनी पहचान खोती जा रही हैं, ऐसे में यह भी आवश्यक हो जाता है कि हम अपनी ज्ञान परम्परा के प्रति सजग एवं सचेत रहें। 'भारतीय ज्ञान परम्परा' केवल अतीत की धरोहर नहीं है — वह एक जीवंत, प्रवाहमान चेतना है जो आज भी हमारे समाज को नई दिशा देने में सक्षम है। 21वीं सदी की सूचना प्रोद्योगिकी एवं डिजिटल क्रांति के इस युग में क्या यह संभव है कि परम्परा और प्रौद्योगिकी सहयात्री हो सके? क्या सनातन मूल्य और आधुनिक मीडिया एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं? इन यक्ष एवं प्रासंगिक प्रश्नों के उत्तर की खोज ज्ञान संचय के इस प्रथम अंक में किया गया है।

प्रस्तुत अंक में समाहित शोध-लेख विविध विषयों की वैचारिक गहराई को रेखांकित करते हैं। 'हिन्दी पत्रकारिता में नवचेतना एवं जीवंतता के विविध आयाम' लेख जहाँ पत्रकारिता के ऊर्जावान स्वरूप और समाज निर्माण में उसकी भूमिका का अन्वेषण करता है, वहीं 'क्वांटम युग: डिजिटल सुरक्षा का नया प्रतिमान' और 'डिजिटल मीडिया और राजनीतिक जागरूकता' वर्तमान समय में सोशल मीडिया की लोकतांत्रिक सक्रियता का मूल्यांकन करता है। दूसरी तरफ, 'सौर ऊर्जा: तकनीकी एवं अनुप्रयोग' जैसे लेख समकालीन तकनीकी प्रगति और भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हैं।

वैचारिक पक्ष को सुदृढ़ करते हुए 'भारतीय ज्ञान परंपरा में राष्ट्रीयता की अवधारणा' एवं 'भारतीय नवजागरण का कला और साहित्य पर प्रभाव' जैसे शोध-पत्र सांस्कृतिक चेतना और मानवतावादी दृष्टिकोण का विश्लेषण करते हैं, वहीं 'सामाजिक समरसता का भाव और संत रविदास का काव्य' सामाजिक समानता के आध्यात्मिक पक्ष को उजागर करता है। भाषा और साहित्य के क्षेत्र में 'भाषा विज्ञान के विकास में संस्कृत का अवदान' प्राचीन जड़ों की महत्ता बताता है, तो 'वैश्वीकरण के परिप्रेक्ष्य में समकालीन हिन्दी उपन्यास' वैश्विक परिवर्तनों के बीच साहित्य की दिशा को स्पष्ट करता है।

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः" — यह केवल एक प्रार्थना नहीं, एक सामाजिक दर्शन है।

हम यह भी स्वीकार करते हैं कि परम्परा का अन्धानुकरण विवेकशीलता नहीं, रूढ़िवाद है। इसीलिए इस पत्रिका का दृष्टिकोण आलोचनात्मक सम्मान का है — हम परम्परा को उसकी समग्रता में देखते हैं। सनातन का अर्थ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है अपितु सनातन एक विश्व-दृष्टि है जो 'एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति' के उद्घोष से आरम्भ होती है — अर्थात् सत्य एक है, जिसे विद्वान अनेक रूपों में कहते हैं।

इक्कीसवीं सदी में मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं रहा — वह संस्कृति का निर्माता, विचारधारा का प्रसारक और सामाजिक परिवर्तन का उत्प्रेरक बन चुका है। सकारात्मक पक्ष यह है कि डिजिटल मीडिया ने लोक-संस्कृति को भी एक नया मंच दिया है। जिन लोकगायकों, शिल्पकारों और पारम्परिक कलाकारों की आवाज़ कभी सुनी नहीं जाती थी, वे आज यूट्यूब और इंस्टाग्राम के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुँच रहे हैं।

"मीडिया तभी सार्थक है जब वह शक्तिहीन की आवाज़ बने, शक्तिशाली का उपकरण नहीं।"

आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), मशीन लर्निंग, बिग डेटा और क्लाउड कम्प्यूटिंग ने ज्ञान के संचय, विश्लेषण और प्रसार की सम्पूर्ण प्रक्रिया को बदल दिया है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक अवसर है, जिसमें भारत अपनी ज्ञान-परम्परा को डिजिटल रूप में सुरक्षित करते हुए विश्व के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।

महात्मा गाँधी ने भी ज्ञान को जीवन से जोड़ने पर बल दिया — 'नई तालीम' की अवधारणा में उन्होंने शिल्प, श्रम और शिक्षा को एक सूत्र में पिरोया। बाबासाहब अम्बेडकर ने जब कहा था कि "शिक्षा शेरनी का दूध है" — तो उनका आशय केवल विद्यालयी शिक्षा से नहीं था।

ज्ञान संचय के पाठकों, शोधार्थियों और लेखकों से हमारी अपील है — ज्ञान को केवल अर्जित मत कीजिए, उसे बाँटिए। समाज में अंतिम जन की सेवा, गरीबी उन्मूलन और स्वावलंबन को अपनी लेखनी का विषय बनाइए। लोक में जो अनकही पड़ी है, उसे शब्द दीजिए, क्योंकि जब तक ज्ञान केवल विश्वविद्यालयों और पुस्तकालयों में बंद रहेगा, वह समाज को बदलने में असमर्थ रहेगा। प्रौद्योगिकी का उपयोग सांस्कृतिक संरक्षण के लिए कीजिए।

ज्ञान तब सार्थक होता है — जब वह मुक्ति का माध्यम बने।

संपादकद्वय

प्रो ऋतु कोहली

प्रो टी एन ओझा

अक्षय तृतीया, 20 अप्रैल, 2026

नवीनतम सूचना

Latest Notices & Announcements

नयाCall for Papers
15 जुलाई 2026

शोध आलेख आमंत्रण — अंक-1 (January-June 2026)

पहले अंक के लिए हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति पर आलेख आमंत्रित। अंतिम तिथि: 15 अप्रैल 2026

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प्रकाशन
30 जून 2026

अंक-1 (January-June 2026) का संभावित प्रकाशित माह

पहला अंक 15+ शोध आलेखों सहित प्रकाशित। प्रकाशन के बाद डिजिटल संस्करण निःशुल्क डाउनलोड हेतु उपलब्ध रहेगा।

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दिशानिर्देश
01 जनवरी 2026

अद्यतन लेखक-दिशानिर्देश जारी

आलेख प्रस्तुत करने से पूर्व नवीनतम दिशानिर्देश पढ़ें। आलेख केवल Unicode (Mangal) फ़ॉन्ट में स्वीकार्य।

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कार्यक्रम एवं कार्यशाला
20 फरवरी 2026

राष्ट्रीय संगोष्ठी — हिंदी: संभावना और चुनौतियाँ

संगोष्ठी के श्रेष्ठ आलेख ज्ञान संचय के विशेष अंक में प्रकाशित किए जाएंगे।

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शोध आलेख प्रस्तुति

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शोध-पत्र प्रारूप

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  • ▶ फ़ॉन्ट: Mangal (Unicode) — 14pt
  • ▶ पंक्ति रिक्ति: 1.5
  • ▶ हाशिया: चारों ओर 1 इंच
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  • ▶ शीर्षक: 12 शब्दों से कम
📚

सामग्री आवश्यकताएँ

  • ▶ सारांश: 150–300 शब्द
  • ▶ 5–7 कुंजी-शब्द (Keywords)
  • ▶ APA / MLA संदर्भ शैली
  • ▶ आलेख पूर्णतः हिंदी में
  • ▶ चित्र/तालिका: क्रमांकित
  • ▶ लेखक परिचय: 100 शब्द

समीक्षा प्रक्रिया

  • ▶ अंध समीक्षा
  • ▶ समीक्षा: 30–45 दिन
  • ▶ Plagiarism Check
  • ▶ प्रकाशन शुल्क:Rs. 1100/
  • ▶ CC BY 4.0 Open License
  • ▶ DOI प्रदान किया जाएगा

प्रकाशित अंक — डिजिटल संग्रह

Published Volumes — Digital Archive

January-June 2026नवीनतम ★
ज्ञान संचय
अंक — 1 · Vol. I

प्रथम अंक (January-June 2026)

18 आलेख · हिंदी: वर्तमान परिप्रेक्ष्य

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July-December 2026
ज्ञान संचय
अंक — 2 · Vol. II(प्रस्तावित)

द्वितीयअंक (July-December 2026)

15 आलेख · हिंदी साहित्य एवं भाषा

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January-June 2027
ज्ञान संचय
अंक — 3 · Vol. III(प्रस्तावित)

तृतीय अंक (January-June 2027)

16 आलेख · संस्कृति एवं समाज

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July-December 2027
ज्ञान संचय
अंक — 4 · Vol. IV(प्रस्तावित)

चतुर्थअंक (July-December 2027)

17 आलेख · अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान

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ज्ञान संचय शोध पत्रिका समिति

Gyan Sanchay — Committee Members

1 शोध पत्रिका प्रबंध समिति
RM

प्रो. रमण मित्तल

विश्वविद्यालय प्रतिनिधि

University Rep.
VB

प्रो. विष्णु भट्ट

विश्वविद्यालय प्रतिनिधि

University Rep.
ST

प्रो. संजीव कुमार तिवारी

प्राचार्य, महाराजा अग्रसेन कॉलेज

प्रबंध संपादक / Patron
RK

प्रो. ऋतु कोहली

संपादक, ज्ञान संचय

Editor
TO

प्रो. टी. एन. ओझा

संपादक, ज्ञान संचय

Editor
2 शोध पत्रिका संपादकीय परामर्शदाता मंडल
SY

प्रो. सुषमा यादव

पूर्व वाईस चांसलर, बीपीएसएमवी हरियाणा

परामर्शदाता
SP

प्रो. श्री प्रकाश सिंह

वाईस चांसलर, HNB गढ़वाल यूनिवर्सिटी

परामर्शदाता
PA

प्रो. पुष्पा अवस्थी

अध्यक्ष, हिंदी यूनिवर्स फाउंडेशन, नीदरलैंड

परामर्शदाता
VK

प्रो. (डॉ.) विनय कुमार

पूर्व अध्यक्ष, मगध विश्वविद्यालय

परामर्शदाता
SM

प्रो. सिरान मुखर्जी

सीनियर रीजनल डायरेक्टर, इग्नू दिल्ली

परामर्शदाता
PK

प्रो. प्रमोद कुमार

BRA बिहार यूनिवर्सिटी, मुजफ्फरपुर

परामर्शदाता
KS

प्रो. कृष्णा शर्मा

पूर्व प्राचार्य, PGDAV कॉलेज, दिल्ली वि.

परामर्शदाता
RP

प्रो. राजेंद्र पांडेय

प्राचार्य, देशबंधु कॉलेज, दिल्ली वि.

परामर्शदाता
AU

प्रो. अर्चना उपाध्याय

श्याम लाल कॉलेज संध्या, दिल्ली वि.

परामर्शदाता
MV

प्रो. ममता वलिया

अंबेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय

परामर्शदाता
3 शोध पत्रिका प्रबंध संपादक एवं संरक्षक / संपादकद्वय
SK

प्रो. संजीव कुमार तिवारी

प्रबंध संपादक एवं संरक्षक
SK

प्रो. ऋतु कोहली

संपादक, ज्ञान संचय
MC

प्रो. टी. एन. ओझा

संपादक, ज्ञान संचय
4 शोध पत्रिका संपादकीय मंडल
SK

प्रो. शिवकुमार

मंडल सदस्य
SK

प्रो. शंकर कुमार

मंडल सदस्य
MC

श्रीमती मनोज चौधरी

मंडल सदस्य
CS

प्रो. चंद्र शेखर

मंडल सदस्य
RK

प्रो. राजहंस कुमार

मंडल सदस्य
AS

प्रो. आभा शर्मा

मंडल सदस्य
SK

प्रो. सुबोध कुमार

मंडल सदस्य
PA

श्रीमती पुनीता अग्रवाल

मंडल सदस्य
AP

डॉ. आलोक पुराणिक

मंडल सदस्य
5 शोध पत्रिका संपादकीय नेपथ्य समिति
JB

डॉ. जितेंद्र कुमार भगत

नेपथ्य सदस्य
SK

डॉ. स्वाति कुमारी

नेपथ्य सदस्य
SP

डॉ. शालेहा प्रवीन

नेपथ्य सदस्य
SD

डॉ. सदानंद

नेपथ्य सदस्य
6 शोध पत्रिका कानूनी सलाहकार समिति
AK

डॉ. अविनाश कुमार

विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय

कानूनी सलाहकार
MO

मोनिका

वकील, दिल्ली उच्च न्यायालय

कानूनी सलाहकार
SJ

संतोष कुमार झा

वकील, दिल्ली उच्च न्यायालय

कानूनी सलाहकार
UK

उज्ज्वल कुमार

वकील, दिल्ली उच्च न्यायालय

कानूनी सलाहकार
UT

उदित कुमार ठाकुर

वकील, दिल्ली उच्च न्यायालय

कानूनी सलाहकार

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पता / Address

ज्ञान संचय
(विशेषज्ञ सहकर्मी द्वारा पूर्व-समीक्षित अर्धवार्षिक शोध पत्रिका)
महाराजा अग्रसेन कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय,दिल्ली
वसुंधरा एन्क्लेव
दिल्ली — 110096

📞

दूरभाष / Phone

+91 99682 83323 +91 98680 00996 +91 88003 66664

सोमवार–शुक्रवार, 10:00–5:00 बजे

✉️

ईमेल / Email

gyansanchay@mac.du.ac.in hspmacdu@mac.du.ac.in hindishodhpatrika@mac.du.ac.in

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